General knowledge.World ki beautiful jagah ki jankari.world amazing jankari

6/24/2016

मेवाड़ राजवंश का संक्षिप्त इतिहास

मेवाड़ राजवंश का संक्षिप्त इतिहास

Posted on Jun 24, 2016


वीर प्रसूता मेवाड की धरती राजपूती प्रतिष्ठा, मर्यादा एवं गौरव का प्रतीक तथा सम्बल है। राजस्थान के दक्षिणी पूर्वी अंचल का यह राज्य अधिकांशतः अरावली की अभेद्य पर्वत श्रृंखला से परिवेष्टिता है। उपत्यकाओं के परकोटे सामरिक दृष्टिकोण के अत्यन्त उपयोगी एवं महत्वपूर्ण है। >मेवाड अपनी समृद्धि, परम्परा, अधभूत शौर्य एवं अनूठी कलात्मक अनुदानों के कारण संसार के परिदृश्य में देदीप्यमान है। स्वाधिनता एवं भारतीय संस्कृति की अभिरक्षा के लिए इस वंश ने जो अनुपम त्याग और अपूर्व बलिदान दिये सदा स्मरण किये जाते रहेंगे। मेवाड की वीर प्रसूता धरती में रावल बप्पा, महाराणा सांगा, महाराण प्रताप जैसे सूरवीर, यशस्वी, कर्मठ, राष्ट्रभक्त व स्वतंत्रता प्रेमी विभूतियों ने जन्म लेकर न केवल मेवाड वरन संपूर्ण भारत को गौरान्वित किया है। स्वतन्त्रता की अखल जगाने वाले प्रताप आज भी जन-जन के हृदय में बसे हुये, सभी स्वाभिमानियों के प्रेरक बने हुए है। मेवाड का गुहिल वंश संसार के प्राचीनतम राज वंशों में माना जाता है। मान्यता है कि सिसोदिया क्षत्रिय भगवान राम के कनिष्ठ पुत्र लव के वंशज हैं




 मेवाड में गहलोत राजवंश – बप्पा ने सन 734 ई० में चित्रांगद गोरी परमार से चित्तौड की सत्ता छीन कर मेवाड में गहलौत वंश के शासक का

सूत्रधार बनने का गौरव प्राप्त किया। इनका काल सन 734 ई० से 753 ई० तक था। इसके बाद के शासकों के नाम और समय काल निम्न था –
रावल बप्पा ( काल भोज ) – 734 ई० मेवाड राज्य के गहलौत शासन के सूत्रधार।
रावल खुमान – 753 ई०
मत्तट – 773 – 793 ई०
भर्तभट्त – 793 – 813 ई०
रावल सिंह – 813 – 828 ई०
खुमाण सिंह – 828 – 853 ई०
महायक – 853 – 878 ई०
खुमाण तृतीय – 878 – 903 ई०
भर्तभट्ट द्वितीय – 903 – 951 ई०
अल्लट – 951 – 971 ई०
नरवाहन – 971 – 973 ई०
शालिवाहन – 973 – 977 ई०
शक्ति कुमार – 977 – 993 ई०
अम्बा प्रसाद – 993 – 1007 ई०
शुची वरमा – 1007- 1021 ई०
नर वर्मा – 1021 – 1035 ई०
कीर्ति वर्मा – 1035 – 1051 ई०
योगराज – 1051 – 1068 ई०
वैरठ – 1068 – 1088 ई०
हंस पाल – 1088 – 1103 ई०
वैरी सिंह – 1103 – 1107 ई०
विजय सिंह – 1107 – 1127 ई०
अरि सिंह – 1127 – 1138 ई०
चौड सिंह – 1138 – 1148 ई०
विक्रम सिंह – 1148 – 1158 ई०
रण सिंह ( कर्ण सिंह ) – 1158 – 1168 ई०
क्षेम सिंह – 1168 – 1172 ई०
सामंत सिंह – 1172 – 1179 ई०
(क्षेम सिंह के दो पुत्र सामंत और कुमार सिंह। ज्येष्ठ पुत्र सामंत मेवाड की गद्दी पर सात वर्ष रहे क्योंकि जालौर के कीतू चौहान मेवाड पर अधिकार कर लिया। सामंत सिंह अहाड की पहाडियों पर चले गये। इन्होने बडौदे पर आक्रमण कर वहां का राज्य हस्तगत कर लिया। लेकिन इसी समय इनके भाई कुमार सिंह पुनः मेवाड पर अधिकार कर लिया। )

कुमार सिंह – 1179 – 1191 ई०
मंथन सिंह – 1191 – 1211 ई०
पद्म सिंह – 1211 – 1213 ई०
जैत्र सिंह – 1213 – 1261 ई०
तेज सिंह -1261 – 1273 ई०
समर सिंह – 1273 – 1301 ई०
(समर सिंह का एक पुत्र रतन सिंह मेवाड राज्य का उत्तराधिकारी हुआ और दूसरा पुत्र कुम्भकरण नेपाल चला गया। नेपाल के राज वंश के शासक कुम्भकरण के ही वंशज हैं। )

35. रतन सिंह ( 1301-1303 ई० ) – इनके कार्यकाल में अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौडगढ पर अधिकार कर लिया। प्रथम जौहर पदमिनी रानी ने सैकडों महिलाओं के साथ किया। गोरा – बादल का प्रतिरोध और युद्ध भी प्रसिद्ध रहा।
36. अजय सिंह ( 1303 – 1326 ई० ) – हमीर राज्य के उत्तराधिकारी थे किन्तु अवयस्क थे। इसलिए अजय सिंह गद्दी पर बैठे।
37. महाराणा हमीर सिंह ( 1326 – 1364 ई० ) – हमीर ने अपनी शौर्य, पराक्रम एवं कूटनीति से मेवाड राज्य को तुगलक से छीन कर उसकी खोई प्रतिष्ठा पुनः स्थापित की और अपना नाम अमर किया महाराणा की उपाधि धारण की । इसी समय से ही मेवाड नरेश महाराणा उपाधि धारण करते आ रहे हैं।
38. महाराणा क्षेत्र सिंह ( 1364 – 1382 ई० )
39. महाराणा लाखासिंह ( 1382 – 11421 ई० ) – योग्य शासक तथा राज्य के विस्तार करने में अहम योगदान। इनके पक्ष में ज्येष्ठ पुत्र चुडा ने विवाह न करने की भीष्म प्रतिज्ञा की और पिता से हुई संतान मोकल को राज्य का उत्तराधिकारी मानकर जीवन भर उसकी रक्षा की।
40. महाराणा मोकल ( 1421 – 1433 ई० )
41. महाराणा कुम्भा ( 1433 – 1469 ई० ) – इन्होने न केवल अपने राज्य का विस्तार किया बल्कि योग्य प्रशासक, सहिष्णु, किलों और मन्दिरों के निर्माण के रुप में ही जाने जाते हैं। कुम्भलगढ़ इन्ही की देन है. इनके पुत्र उदा ने इनकी हत्या करके मेवाड के गद्दी पर अधिकार जमा ल

6/23/2016

Brunei sultan

Brunei
Negara Brunei Darusalam
برني دارالسلام (Negara Brunei Darussalam)


Jhanda Coat of arms

Des ke jaankari
Des ke motto: (English: Always in service with God's guidance)
National anthem: Allah Peliharakan Sultan (God Bless the Sultan)
Log ke baare me
Official bhasa: Malay
Abaadi:
  - Total: 374,000 (ranked 173)
  - Density: 65 per km²
Jagah


In pe des ke dunia ke map me dekhawa jaawe hai.
Capital City: Bandar Seri Begawan
Sab se barraa City: Bandar Seri Begawan
Area
  - Total: 5,765 (ranked 171)
  - Water: n/a km² (8.6%)
Politics / Government
Established: 1 January 1984
Leader: Saltan: Hassanal Bolkiah
Economy / Money
Paisa ke naam: Brunei Ringgit (RM) (MYR)
International information
Time ke zone: +8
Telephone ke dialing code: 673
Internet domain: .bn
Sultanate of Brunei, South-East Asia ke ek des hai. Iske parrosi des Malaysia aur Indonesia hai. Brunei ke capital Bandar Seri Begawan hai. Ii ek chota des hai.

Brunei ke leader Sultan hai, jon ki dunia ke ek sab se dhanii admii hai. Iske kaaran hian pe tel se hai.

Brunei ke khaas dharam Islam hai lekin kuchh log Buddhism aur Animism ke bhi follow kare hai.

6/17/2016

Biography & Mark Zuckerberg {in Hindi} की फेसबुक बनाने की Complete Story

Biography & Mark Zuckerberg {in Hindi} की फेसबुक बनाने की Complete Story


दुनिया में यूँ तो रोजाना हजारों लोग जन्म लेते हैं लेकिन कुछ लोग दुनिया बदलने के लिए ही पैदा होते हैं। मार्क जुकरबर्ग(Mark Zuckerberg) भी एक ऐसा ही नाम है जिसने अपने जीवन में ऐसी ऊंचाइयों को छुआ जहाँ पहुँचना एक सामान्य व्यक्ति के लिए सपने जैसा है। आज फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग(Mark Zuckerberg) युवाओं के लिए एक प्रेरणा हैं लोग उनके जैसा बनना चाहते हैं और जितनी खुशियां मार्क जुकरबर्ग(Mark Zuckerberg) ने इस दुनियां को दी हैं वो शायद ही किसी ने दी हों।

Mark Zuckerberg Biography in Hindi




May 14th, 1984 को मार्क जुकरबर्ग(Mark Zuckerberg) का जन्म हुआ। 2016 में उनके पास $48.2 billion की संपत्ति है और ये बात तो जगजाहिर है कि मार्क दुनिया के सबसे युवा बिलिनेयर में से एक हैं। मार्क की कहानी बहुत ही interesting है, आज हम जानेंगे कि कैसे एक युवा लड़के ने एक वेबसाइट बनायीं? और कैसे वो बना दुनिया की सबसे बड़ी वेबसाइट का मालिक?

Mark Zuckerberg Life History in Hindi

जुकरबर्ग(Mark Zuckerberg) को बचपन से ही कंप्यूटर और इंटरनेट का बहुत शौक था। छोटी सी उम्र से ही वो कम्प्यूटर के प्रोग्राम लिखने लगे थे। उनके पिता उनको प्रोग्रामिंग करने में बहुत मदद करते थे लेकिन मार्क बहुत तेज दिमाग के थे। इसीलिए पिता को मार्क में लिए एक कम्प्यूटर टीचर बुलाना पड़ा जो मार्क को रोजाना कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग सिखाया करता था। मार्क की तेज बुद्धि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि छोटी से उम्र में ही मार्क अपने कंप्यूटर टीचर को भी फेल कर दिया करते थे। उनके अनुभवी टीचर उनकी बातों का जवाब नहीं दे पाते थे।

हाई स्कूल में मार्क ने मैथ्स और फिजिक्स में कई अवार्ड भी जीते। हाई स्कूल की पढाई के दौरान ही मार्क ने एक कंप्यूटर प्रोग्राम बनाया – “Zucknet”, ये एक ऐसा सॉफ्टवेयर था जिससे मार्क घर बैठे हुए ही दुकान पर बैठे पिता से बात कर लेते थे। यही नहीं जिस उम्र में लोग कम्प्यूटर गेम चलाना सीखते हैं, मार्क उस उम्र में कम्प्यूटर गेम्स बनाते थे।

जब हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया तो वहां भी मार्क एक टॉपर छात्र थे और लोगों के बीच “Programming Expert” के नाम से मशहूर थे। यहीं पर उन्होंने “CourseMatch” नाम का एक सॉफ्टवेयर बनाया जो लोगों को अपनी रूचि के अनुसार सही कोर्स select करने में मदद करता था।

History of Facebook in Hindi

कॉलेज के दिनों में “Facebooks” नाम की एक बुक हुआ करती थी जिसमें कॉलेज के सभी स्टूडेंट्स के फोटो और नाम लगे हुए थे। ऐसे ही कुछ सोचकर मार्क जुकरबर्ग ने एक “Facemash” नाम की वेबसाइट बनाई। खास बात ये थी कि इस वेबसाइट में कॉलेज की लड़कियों के फोटो आते थे और उनकी तुलना की जाती थी कि कौन ज्यादा हॉट है। ये वेबसाइट कॉलेज के स्टूडेंट्स में बहुत फेमस हुई लेकिन कॉलेज वालों ने और कुछ लड़कियों ने इसे आपत्तिजनक बताया और इसका विरोध किया। सबसे मजेदार बात इस वेबसाइट में ये थी इस वेबसाइट के लिए लड़कियों की फोटो इकठ्ठा करने के लिए मार्क ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की वेबसाइट हैक की थी जो उस समय की सबसे strong वेबसाइट मानी जाती थी। इसके लिए हार्वर्ड वालों ने मार्क को बहुत डांटा भी क्यूंकि ये वेबसाइट इतनी ज्यादा पॉपुलर हो गई थी कि हार्वर्ड का सर्वर डाउन हो जाता था।

2004 में मार्क ने एक वेबसाइट बनायीं TheFacebook, जो www.thefacebook.com इस डोमेन पर चलती थी। ये वेबसाइट अभी तक केवल हार्वर्ड में ही फेमस थी लेकिन धीरे धीरे ये वेबसाइट दूसरे कॉलेज में भी पसंद की जाने लगी। मार्क और उसके अन्य कुछ दोस्त(Eduardo Saverin, Andrew McCollum, Chris Hughes and Dustin Moskovitz) इन लोगों ने मिलकर इस वेबसाइट का प्रचार पूरे US के कॉलेजों में करना शुरू किया। ये वेबसाइट बहुत ज्यादा तेजी से पॉपुलर हो रही थी।



कुछ समय तक ये वेबसाइट केवल कॉलेज के स्टूडेंट्स के लिए ही थी लेकिन बाद में दुनिया भर में पॉपुलर होने लगी तो मार्क ने अपनी पढाई को बीच में ही छोड़ देने का फैसला लिया। और इस तरह मार्क ने कॉलेज छोडकर अपनी टीम के साथ पूरी मेहनत के साथ इस वेबसाइट पर काम करना शुरू कर दिया। 2005 में ये “TheFacebook” नाम की वेबसाइट बन गयी “Facebook”। साल 2007 तक फेसबुक पर लाखों बिजनिस पेज और लाखों प्रोफाइल बन चुके थे। अब वो समय आ गया था जब फेसबुक पूरी दुनिया पर राज करने वाली थी। 2011 तक ये वेबसाइट दुनिया की सबसे बड़ी वेबसाइट बन चुकी थी, और मार्क जुकरबर्ग बन चुके थे इंटरनेट की दुनिया के बादशाह।


Mark Zuckerberg
2010 में Time magazine ने मार्क जुकरबर्ग को दुनियां के टॉप 100 अमीर और प्रभावशाली लोगों में शामिल किया और 2016 में उनके प

6/15/2016

कैसे बना एक तांगेवाला अरबपति 

कैसे बना एक तांगेवाला अरबपति How MDH Become Millionaire
                                                                             

 महाशय धरमपाल हट्टी(M.D.H), आज ये नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है| “मसाला किंग”(M.D.H) के नाम से मशहूर महाशय जी आज सफलता की बुलंदियों पर हैं, लेकिन इस सफलता के पीछे एक बहुत सघर्ष भरी कहानी है|

इनका जन्म सियालकोट(जो अब पाकिस्तान में है) में हुआ था| ये एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते थे, परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी न थी| महाशय जी जब धीरे धीरे बड़े हुए तो स्कूल में दाखिला कराया ये बचपन से ही पढ़ाई में बहुत कमजोर थे पढ़ने लिखने में बिल्कुल मन नहीं लगता था| इनके पिता इनको बहुत समझाते लेकिन महाशय जी बिल्कुल भी पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते थे, इसी वजह से पाँचवी कक्षा में वो फेल हो गये और इसी के साथ उन्होनें स्कूल जाना भी छोड़ दिया| पिता ने इनको इसके बाद एक बढ़ई की दुकान पर काम सीखने के लिए भेज दिया| कुछ दिन बाद इनका मन बढ़ई के काम में नहीं लगा तो छोड़ दिया| धीरे धीरे समय आगे बढ़ता गया, इसी बीच महाशय जी 15 साल की उम्र तक करीब 50 काम बदल चुके थे| उन दिनों सियालकोट लाल मिर्च के लिए बहुत प्रसिद्ध था, यही सोचकर महाशय जी के पिताजी ने एक छोटी सी मसाले की दुकान करा दी धीरे धीरे व्यापार अच्छा बढ़ने लगा| लेकिन उन दिनों आज़ादी का आंदोलन अपने चरम पे था| 1947, में जब देश आज़ाद हुआ तो सियालकोट पाकिस्तान का हिस्सा बन चुका था और वहाँ रह रहे हिंदू असुरक्षा महसूस कर रहे थे और दंगे भी काफ़ी भड़क चुके थे इसी डर से उन्हें सियालकोट छोड़ना पड़ा| महाशय जी के अनुसार उन दिनों स्थिति बहुत भयावह थी, चारों तरफ मारामारी मची हुई थी| इन्हें भी अपना घर बार छोड़ कर भागना पढ़ा| बड़ी ही दिक्कत और मुश्किलों से वो नानक डेरा(भारत) पहुचे पर अभी वो शरणार्थी थे अपना सब कुछ लूट चुका था| इसके बाद स्पारिवार कई मीलों चलकर ये अमृतसर पहुचे| दिल्ली में इनके एक रिश्तेदार रहते थे, यही सोच कर महाशय जी करोलबाग देल्ही आ गये| उस समय उनके पास केवल 1500 रुपये थे कोई काम धंधा था नहीं| उन्होनें कुछ पैसे जुटाकर एक तांगा-घोड़ा खरीद लिया| और इस तरह वो बन गये एक तांगा चालक|


लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था, करीब २ महीने तक उन्होने कुतुब रोड दिल्ली पर तांगा चलाया| इसके बाद उन्हें लगा की वो ये कम नहीं कर पाएँगे| लेकिन मसाले के सिवा वो कोई दूसरा कम जानते भी नहीं थे, कुछ सोचकर उन्होने घर पे ही मसाले का काम करने लगे| बाज़ार से मसाला लाकर घर पर ही उसे कुटते थे और बाज़ार में बेचते थे| उनकी ईमानदारी और मसालों की शुद्धता की वजह से उनका कारोबार धीरे धीरे बढ़ने लगा| डिमांड ज़्यादा हुई तो मसाले घर ना पीसकर एक व्यापारी के यहाँ चक्की पर पिसवाते थे| एक दिन जब व्यापारी से मिलने गये तो उन्होने देखा कि वह मसालों में मिलावट करता था ये देखकर महाशय जी को मन ही मन बहुत दुख हुआ और उन्होने खुद की मसाला पीसने की फॅक्टरी लगाने की सोची|

किर्तिनगर में इन्होने पहली फैक्टरी लगाई और उस दिन के बाद महाशय जी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक पूरे विश्व भर में अपने कारोबार(Business) को फैलाया|आज .M.D.H. एक बड़ा ब्रांड बन चुका है और पूरे विश्व में फैला हुआ है| आज महाशय जी बहुत बड़े अरबपति उद्धयोग(Richest Business) के मलिक हैं|

महाशय जी की इस छवि से हटकर एक रूप और है वो है समाज सेवा| पूरे भारत में कई जगह उनके द्वारा संचालित विद्धयालय और अस्पताल हैं|

कहा जाता है क़ि “इंसान अपनी परिस्थितियों का नहीं अपने फ़ैसलों और कर्मों का परिणाम होता है”, ऐसा ही कुछ सीखने को मिलता है महाशय जी के जीवन से|

तो आओ मित्रों हम भी इस महान पुरुष के जीवन से प्रेरणा लेकर सफल बनने का प्रयास करते हैं

सफलता की कहानियां हिंदी में,

सफलता की कहानियां हिंदी में, Real Businessman Success Stories in Hindi
 

कहा जाता है कि अगर कुछ करने की लगन और जज्बा हो तो किस्मत पलटते देर नहीं लगती। कबीरदास जी ने बिलकुल सही कहा है – ‘रसरी आवत जात से सिल पर परत निसान’, लगातार कठोर मेहनत करने से हर कठिन कार्य को आसान किया जा सकता है।

वीएसएस मणि, ये नाम है उस सख्श का जिसने देश के युवाओं के लिए एक मिशाल पेश की है और बताया कि कैसे कठिन संघर्षो के बावजूद भी सफलता हासिल की जाती है । वीएसएस मणि जी “jusl dial” कंपनी के मालिक हैं और कलकत्ता के रहने वाले हैं । “Just Dial” आज 900 करोड़ की कंपनी है जिसमें हजारों कर्मचारी काम करते हैं।


एक समय था जब वीएसएस मणि जी कठिन संघर्षों से गुजर रहे थे। बहुत कोशिशों के बावजूद भी कोई कार्य सफल नहीं हो पा रहा था । वैसे Just Dial का आइडिया उनके दिमाग में 22 साल की उम्र से ही था और इसी की वजह से उन्होंने Askme नाम की एक कंपनी भी शुरू की थी लेकिन ये कंपनी बहुत ज्यादा सफल नहीं हो पायी । उन संघर्षों के दिनों में वीएसएस मणि जी ने पत्नी के गहने बेच कर Just Dial की शुरूआात की और उनकी कठिन मेहनत का नई नतीजा है कि आज कंपनी 900 करोड़ की हो गयी है ।

यही नहीं , स्वयं अमिताभ बच्चन JustDial के ब्रांड एम्बेसडर हैं और आज ये बहुत विख्यात कंपनी में से एक है । 8888888888 ये नंबर JustDial के लिए प्रयोग किया जाता है। वीएसएस मणि जी आज उस मुकाम पर हैं कि उनका जीवन युवाओं के लिए एक प्रेरणा का स्रोत हो सकता है ।

मित्रों , जीवन में जब कठिन समय आये तो घबराएं नहीं क्यूंकि संघर्ष एक परीक्षा के समान है जिसमें उत्तीर्ण होकर ही आप सफल हो सकते हैं। इस Real कहानी से आपने क्या सीखा ,Comment के माध्यम से हमें जरूर बताएं

असफलता सफलता से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है
 

Stories of Motivation

सभी के जीवन में एक समय ऐसा आता है जब सभी चीज़ें आपके विरोध में हो रहीं हों | चाहें आप एक प्रोग्रामर हैं या कुछ और, आप जीवन के उस मोड़ पर खड़े होता हैं जहाँ सब कुछ ग़लत हो रहा होता है| अब चाहे ये कोई सॉफ्टवेर हो सकता है जिसे सभी ने रिजेक्ट कर दिया हो, या आपका कोई फ़ैसला हो सकता है जो बहुत ही भयानक साबित हुआ हो |

लेकिन सही मायने में, विफलता सफलता से ज़्यादा महत्वपूर्ण होती है | हमारे इतिहास में जितने भी बिजनिसमेन, साइंटिस्ट और महापुरुष हुए हैं वो जीवन में सफल बनने से पहले लगातार कई बार फेल हुए हैं | जब हम बहुत सारे कम कर रहे हों तो ये ज़रूरी नहीं कि सब कुछ सही ही होगा| लेकिन अगर आप इस वजह से प्रयास करना छोड़ देंगे तो कभी सफल नहीं हो सकते |


हेनरी फ़ोर्ड, जो बिलियनेर और विश्वप्रसिद्ध फ़ोर्ड मोटर कंपनी के मलिक हैं | सफल बनने से पहले फ़ोर्ड पाँच अन्य बिज़निस मे फेल हुए थे | कोई और होता तो पाँच बार अलग अलग बिज़निस में फेल होने और कर्ज़ मे डूबने के कारण टूट जाता| लेकिन फ़ोर्ड ने ऐसा नहीं किया और आज एक बिलिनेअर कंपनी के मलिक हैं |

अगर विफलता की बात करें तो थॉमस अल्वा एडिसन का नाम सबसे पहले आता है| लाइट बल्व बनाने से पहले उसने लगभग 1000 विफल प्रयोग किए थे |

अल्बेर्ट आइनस्टाइन जो 4 साल की उम्र तक कुछ बोल नहीं पता था और 7 साल की उम्र तक निरक्षर था | लोग उसको दिमागी रूप से कमजोर मानते थे लेकिन अपनी थ्ओरी और सिद्धांतों के बल पर वो दुनिया का सबसे बड़ा साइंटिस्ट बना |

अब ज़रा सोचो की अगर हेनरी फ़ोर्ड पाँच बिज़नेस में फेल होने के बाद निराश होकर बैठ जाता, या एडिसन 999 असफल प्रयोग के बाद उम्मीद छोड़ देता और आईन्टाइन भी खुद को दिमागी कमजोर मान के बैठ जाता तो क्या होता?

हम बहुत सारी महान प्रतिभाओं और अविष्कारों से अंजान रह जाते |

तो मित्रों, असफलता सफलता से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है….. keep reading short stories on inspiration…….

6/12/2016

daughter



એક પિતાએ એની લાડક્વાયી દીકરીની સગાઇ કરી. છોકરો ખુબ સારો અને સઁસ્કારી હતો એટલે છોકરીનાં પિતા ખૂબ ખુશ હતા. વેવાઈ પણ માણસાઈ વાળા હતા એટલે છોકરીના પિતાને માથા પરથી મોટો બોજો ઉતારી ગયો હોય એવી હળવાશ અનુભવતા હતા.

એકદિવસ છોકરીના સાસરિયાં વાળાએ વેવાઈને જમવા માટે તેડાવ્યા. તબિયત સારી ના હોવા છતાં છોકરીના પિતા એમના નવા વેવાઈના મહેમાન બન્યા. દીકરીના સાસરિયામાં એમને આદર સાથે આવકાર આપવામાં આવ્યો. વેવાઈ માટે ચા આવી. ડાયાબિટીસ હોવાથી ડોક્ટરે ખુબ સાવચેતી રાખવાનું કહેલું અને ખંડવાલી ચા પીવાથી મનાઈ કરેલી પણ નવા સંબંધીને ખોટું ના લાગે એટલે ચા લઈ લીધી. ચાની પહેલી ચૂસકી મારી તો બિલકુલ ઘર જેવી જ ચા હતી. ખાંડ વગરની અને ઈલાયચી નાંખેલી. છોકરીના પિતાને થયું મારા ટેસ્ટની આ લોકોને કેમ ખબર હશે ?

બપોરે જમવા બેઠા ત્યારે પણ બધી જ રસોઈ ડોકટરે જેવી સલાહ આપી હતી તે મુજબની જ હતી. બપોરની આરામની વ્યવસ્થા, ઉઠીને તુરંત વરિયાળીનું પાણી બધી જ વ્યવસ્થા ઘર જેવી જ હતી. છોકરીના પિતાને સમજાતું નહોતું કે નવા વેવાઈને આ બધી ખબર કેમ પડી? જયારે એમણે દીકરીના સાસરિયામાંથી વિદાય લીધી ત્યારે પૂછ્યા વગર ના રહી શક્યા કે મારે શું ખાવાનું છે ? શું પીવાનું છે ? મને કેવો ટેસ્ટ પસંદ છે ? આ બધી ખબર તમને કેમ પડી ?

દીકરીના સાસુએ કહ્યું , " કાલે સાંજે જ તમારી દીકરીનો મારા પર ફોન આવી ગયો હતો. એણે મને કહ્યું કે મારા પપ્પા એના સ્વભાવ પ્રમાણે કઈ બોલશે નહી પણ એની તબિયતને ધ્યાને લેતા કેટલીક બાબતોનું ખાસ ધ્યાન રાખવાનું છે. તમે મારા પપ્પાને સાચવજો." બાપની આંખ ભીની થઇ ગઈ.

છોકરીના પિતા ઘરે આવ્યો એટલે ડ્રોઈંગરૂમમાં રાખેલા સ્વર્ગવાસી માતાના ફોટા પરથી હાર ઉતારીને નીચે મૂકી દીધો. એના પત્નીએ પૂછ્યું," કેમ બાના ફોટા પરથી હાર ઉતારી લીધો." આંખમાં આંસુ સાથે પતિએ એની પત્નીને કહ્યું, " મને આજે ખબર પડી કે મારુ ધ્યાન રાખનારી મારી માં ગઈ જ નથી. આ જ ઘરમાં હવે એ દીકરીના રુપે રહે છે."

મિત્રો, જેના ઘરમાં દીકરી હોય એને બે માનો પ્રેમ મળે છે એક જન્મદાત્રી માં અને બીજી દીકરીમાં રહીને બાપને જીવની જેમ સાચવતી માં. દીકરી એ માત્ર દીકરી જ નહી બાપની માં પણ હોય છે.

_Save Daughter Child_

Popular Posts

Categories

Blog Archive

Featured post

दुनिया की सबसे खुबसूरत गुफाएं – Most Beautiful Caves of the World

 July 09.2016 दोस्तों, प्रकृति की खूबसूरती का कोई जवाब नहीं होता, लेकिन सिर्फ़ ऊपर ही नहीं धरती के गर्भ में भी कई ऐसी ही खूबसूरती बसी...

Contact Form

Name

Email *

Message *












.

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner